Ravi Ranjan

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Thursday, 12 January 2017

दूसरों के भरोसे मत रहो, अपना काम खुद करो

birds motivational storyकहानियाँ सुनने में तथा पढने में बेशक कहानियाँ ही लगें लेकिन उनके अन्दर एक सन्देश छुपा होता है। कहानियों में एक ऐसी प्रेरणा होती है, एक ऐसी सीख होती है, जिससे हम अपनी जिंदगी में नकारात्मकता तथा अंधेरों से निकलकर एक सकारात्मक जिन्दगी जियें तथा अपने आपको बेहतर बना सकें, आत्मनिर्भर बना सकें।
आइये आज मैं आपके सामने ऐसी ही एक कहानी पेश कर रहा हूँ जो आपको आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रेरित करेगी।
एक बार एक किसान के गेंहू के खेत में एक चिड़िया ने घोंसला बना रखा था। उस घोंसले में उसने अंडे दिये। कुछ समय बाद अंडो में से बच्चे निकले। चिड़िया दाना चुगने के लिए दूर जंगल में जाती थी और अपने बच्चों के लिये दाना लेकर लौटती थी। इस दौरान उसके बच्चे घोंसले में अकेले रहते थे। जब चिड़िया दाना लेकर लौटकर आती तो बच्चे बहुत खुश होते और उसके द्वारा लाए गए दानों को खाते।
एक दिन चिड़िया जब दाना लेकर लौटी तो उसने देखा कि उसके बच्चे बहुत डरे हुए हैं। उसने बच्चों से पूछा  “ क्या बात है बच्चो ..? तुम सब  इतने डरे हुए क्यों हो? ”
बच्चों ने बताया कि  “ आज किसान आया था और वह कह रहा था कि फ़सल अब पक चुकी है, मैं कल अपने बेटों से फसल काटने के लिये कहूँगा। अगर उसने फसल काटी तो हमारा घोसला टूट जायेगा, फिर हम कहाँ रहेंगे..? ”
चिड़िया बोली  “ फ़िक्र मत करो बच्चों , अभी खेत की फसल नही कटेगी।”
सच में अगले दिन कोई फसल काटने नहीं आया। और चिड़िया के बच्चे बेफिक्र हो गए। लेकिन कुछ दिनों बाद चिड़िया को बच्चे फिर से डरे हुए मिले। चिड़िया के पूछने पर बच्चों ने बताया  “ किसान आज भी आया था , और कह रहा था कि बेटे नहीं आये तो क्या हुआ? कल फसल काटने के लिए मजदूरों को भेजूंगा।”
इस बार भी चिड़िया ने बच्चों से कहा  “ डरने की जरुरत नहीं हैं , फसल कल भी नहीं कटेगी।”
ऐसे ही कुछ दिन और बीत गए। कोई फसल काटने के लिए नहीं आया।
कुछ दिन बाद एक दिन बच्चे फिर से डरे हुए थे। और उन्होंने चिड़िया को बताया  कि “ आज किसान फिर से आया था और कह रहा था कि दूसरों के भरोसे रहकर मैंने फ़सल काटने में बहुत देर कर दी है। मैं कल खुद ही फ़सल को काटने आऊँगा।
यह सुनकर चिड़िया बच्चों से बोली  “ अब हमें यह जगह छोड़कर कोई सुरक्षित जगह चले जाना चाहिए। क्योंकि कल खेत की फ़सल जरुर कटेगी।  ”
वह तुरंत बच्चों को लेकर एक दूसरे घोसले में  आ गई। जिसे उसने कई दिनों से कड़ी मेहनत कर के बनाया था।
अगले दिन चिड़िया और उसके बच्चो ने देखा कि किसान ने फसल काटनी शुरू कर दी है।
बच्चों ने बड़ी हैरानी से चिड़िया से पूछा  “ माँ , तुमने कैसे जाना कि कल खेत की फसल कट ही जाएगी?”
चिड़िया ने बच्चो को बताया कि “जब तक इंसान किसी कार्य के लिए दूसरों पर निर्भर रहता है, वह कार्य पूरा नहीं होता है। लेकिन जब इंसान  उस कार्य को खुद करने की ठान लेता है तो वो कार्य जरुर पूरा होता है। किसान जब तक दूसरों पर निर्भर था तब तक उसकी फसल नहीं कटी। लेकिन जब उसने खुद फसल काटने का फैसला किया तो उसकी फसल कट गयी।
दोस्तों, हमारे साथ भी यही होता है। जब तक हम किसी भी काम के लिए दूसरों पर निर्भर रहते हैं तो उस काम के होने की सम्भावना बहुत कम होती हैं। और अगर वो काम हो भी गया तो उस तरह से नहीं हो पाता जैसे हम चाहते थे। लेकिन अगर वही काम हम खुद करें तो वो काम समय पर हो भी जायेगा और जैसा हम चाहते हैं वैसा ही होता है।
तो दोस्तों अपने किसी भी काम के लिए पूरी तरह से दूसरों पर निर्भर नहीं रहें। जहाँ तक हो सके अपने काम खुद ही करें। अगर काम दूसरों से करवाना भी है तो अपनी देख रेख में करवायें ताकि काम सही से तथा समय पर पूरा हो जाये।

अपने आप को मुश्किलों, मुसीबतों से बड़ा

अपने आप को मुश्किलों, मुसीबतों से बड़ा बना लो (Make yourself greater than problems)

make yourself big than problemsमुश्किलें, मुसीबतें सभी की जिंदगी में लगी रहती हैं। लेकिन जो इन्सान छोटी सी मुश्किल या मुसीबत को बहुत बड़ा बना लेता है या इनसे डर जाता है` ये उसकी जिंदगी में कड़वाहट घोल देती हैं और उसकी जिंदगी को निराशा से भर देती हैं और वो इन्सान अपनी जिंदगी में कभी आगे नहीं बढ़ पाता है। लेकिन जो इन्सान इनसे घबराता नहीं है और खुद को इनसे भी बड़ा बना लेता है ये उसकी जिंदगी की मिठास को नहीं छीन पाती हैं और वो इन्सान बहुत जल्दी इनसे बाहर निकल जाता है।
इससे सम्बंधित एक कहानी आज मैं आपके सामने पेश कर रहा हूँ और उम्मीद करता हूँ कि ये कहानी आपको पसंद आएगी।
एक बार एक व्यक्ति अपनी जिंदगी में बहुत परेशान हो गया। मुश्किलों और मुसीबतों से वह इस कदर टूट गया कि उसके मन में हर पल नकारात्मक विचार आने लगे। बहुत ज्यादा हताश होने पर वह एक संत के पास पहुँचा और उनसे अपनी समस्या बताई। संत ने उसकी बात को ध्यानपूर्वक सुना और उसे अगले दिन आने को कहा।
अगले दिन जब वह व्यक्ति संत के पास पहुँचा तो उन्होंने उसे पानी से भरा एक गिलास देते हुए कहा  “इसमें एक मुट्ठी नमक डालो और इस पानी को पी जाओ।”
वह व्यक्ति संत की बात को मानते हुए पानी में नमक डालकर पीने लगा। लेकिन एक घूँट पानी से ज्यादा नहीं पी पाया और थूक दिया।
संत ने पूछा “क्या हुआ? पानी का स्वाद कैसा लगा?”
“बिल्कुल बेकार….. एकदम कड़वा” व्यक्ति ने जवाब दिया।
संत थोड़ा मुस्कुराये और बोले “अब एक मुट्ठी नमक और लो और मेरे पीछे पीछे आओ।”
वह व्यक्ति नमक लेकर संत के पीछे पीछे चलने लगा।
थोड़ी देर चलने के बाद संत एक झील के पास जाकर रुके।
अब संत ने व्यक्ति से कहा “इस नमक को झील में डाल दो।”
व्यक्ति ने नमक झील में डाल दिया।
उसके बाद संत बोले “अब इस झील का पानी पियो।”
व्यक्ति ने झील से पानी लिया और पीने लगा।
जब व्यक्ति ने पानी पी लिया तब संत ने उससे फिर पूछा “अब पानी का स्वाद कैसा है? क्या यह तुम्हे अभी भी कड़वा लग रहा है?”
“नहीं.. नहीं.. ये तो बहुत मीठा है। व्यक्ति ने जवाब देते हुए कहा।
फिर संत ने उसे समझाते हुए कहा। “जीवन के दुःख भी बिल्कुल नमक की तरह ही हैं। ना तो इससे कम और ना ही इससे ज्यादा। जीवन में दुखों की मात्रा वही रहती है लेकिन ये हम पर निर्भर करता है कि हम दुखों, मुश्किलों, मुसीबतों का सामना किस तरह से करते हैं। अगर हमने खुद को छोटा करके दुखों को बहुत बड़ा बना दिया तो ये दुःख हमारी जिंदगी को कड़वाहट से भर देंगे। और यदि हमने दुखों की तुलना में खुद को बहुत बड़ा बना लिया तो कोई भी दुःख हमारी जिंदगी की मिठास को नहीं छीन सकता ।”
दोस्तों, ये कहानी बहुत प्रेरणादायक है। और ये बात बिल्कुल सच है। चाहे कितनी भी मुसीबतें आयें, चाहे कितनी भी मुश्किलें घेर लें, चाहे कितनी भी परेशानियाँ आ जायें, अपने आप को इतना बड़ा बना लो कि कोई भी परेशानी आपकी जिंदगी की मिठास को ना छीन सके। सारी परेशानियाँ आपको छोटी लगने लगें और आप बिना हिम्मत हारे उन मुश्किलों, उन परेशानियों का सामना कर सकें और उनसे बाहर निकल सकें।
जब भी आपकी जिंदगी में कोई दुःख आये, कोई मुश्किल या मुसीबत आये हमेशा अपने आप से कहें कि ये दुःख, ये मुश्किल, ये मुसीबत मेरी हिम्मत के आगे बहुत छोटी है और ये मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकते और मैं इनसे हारूँगा नहीं, मैं इनका सामना करूँगा और इन्हें हरा दूँगा।

Monday, 9 January 2017

आदर्श शिक्षक डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन

भारत के पहले उप-राष्ट्रपति और दुसरे राष्ट्रपति डा0 सर्वपल्ली राधाकृष्णन (Sarvepalli Radhakrishnan) का जन्म 5 सितम्बर 1888 को चेन्नई से 84 किलोमीटर दूर एक छोटे कस्बे तिरुतनी में हुआ था। इनका परिवार सांस्कृतिक जीवन जीने वाला साधारण ब्राह्मण परिवार था।
उनका बाल्यकाल तिरुतनी एवं तिरुपति जैसे धार्मिक स्थलों पर ही व्यतीत हुआ। इन्होने प्रथम आठ वर्ष तिरुतनी में ही गुजारे।
वे अपने पिता की दूसरी संतान थे, 6 भाई-बहन सहित 8 सदस्यों के परिवार की आय सीमित थी इसलिए डा0 राधाकृष्णन का बचपन कठिनाइयों और गरीबी में बीता उन्होंने गरीबी का जीवन जीते हुए भी यह सिद्ध कर दिया की प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती।
डा0 सर्वपल्ली राधाकृष्णन बचपन से ही मेघावी थे। उन्होंने अपने लेखों और भाषणों के माध्यम से विश्व को दर्शन-शास्त्र से परिचित कराया। वे समूचे विश्व को एक विद्यालय मानते थे। डा0 सर्वपल्ली राधाकृष्णन शिक्षा में कट्टर विश्वास रखते थे, और जाने-माने विद्वान, राजनयिक और आदर्श शिक्षक थे। वह एक महान स्वतंत्रता सेनानी भी थे। वह एक महान दार्शनिक और शिक्षक थे। उनको अध्यापन के पेशे से गहरा प्यार था।
वे एक शिक्षक से लेकर राष्ट्रपति के उच्च पद तक पहुचे उन्होंने वेल्लूर और मद्रास कॉलेज में शिक्षा प्राप्त की,उसके बाद दर्शन शास्त्र में स्नाकोतर करके मद्रास रेजीडेन्सी कॉलेज में ही दर्शनशास्त्र के प्राध्यापक हो गए।
डा0 राधाकृष्णन ने वेदों और उपनिषदों का गहन अध्ययन किया और भारतीय दर्शन से विश्व को परिचित कराया वे सावरकर और विवेकानन्द के आदर्शो से प्रभावित थे। बहुआयामी प्रतिभा के धनी डा0 राधाकृष्णन को देश की संस्कृति से प्यार था शिक्षक के रूप में उनकी प्रतिभा,योग्यता और विद्यता से प्रेरित होकर ही उन्हें सविधान निर्मात्री सभा का सदस्य बनाया गया वे प्रसिद्ध विश्वविधालयो के उपकुलपति भी रहे। भारत की आज़ादी के बाद डा0 राधाकृष्णन सोवियत संघ में राजदूत बने 1952 तक वे रूस में राजनयिक रहे। उसके बाद उनको भारत के उपराष्ट्रपति नियुक्त किया गया, 1962 में डा0 राजेन्द्र प्रसाद के बाद वे भारत के दुसरे राष्ट्रपति बने इनका कार्यकाल चुनौतियों भरा रहा। चीन और पाकिस्तान के साथ भारत का युद्ध तथा दो प्रधानमंत्रियो का निधन इनके इनके कार्यकाल में ही हुए। डा0 राधाकृष्णन ने राष्ट्रपति के रूप में अपना दूसरा कार्यकाल नेताओ के आग्रह के बाद भी अस्वीकार कर दिया।
शिक्षा, दर्शन और राजनीति में योगदान के लिए डा0 राधाकृष्णन को देश का सर्वोच्च अलंकरण “भारत रत्न” प्रदान किया गया तथा अमेरिकी सरकार ने धर्म और दर्शन के क्षेत्र में उत्थान के लिए उन्हें मरणोपरांत “टेम्पलटन पुरस्कार” से सम्मानित किया वे पहले गैर ईसाई थे उन्होंने यह पुरस्कार प्राप्त किया था।
उन्होंने अपने जीवन के 40 वर्षो शिक्षक के रूप में व्यतीत किया उन्हें आदर्श शिक्षक के रूप में याद किया जाता हैं उनका जन्मदिन 5 सितम्बर भारत में शिक्षक दिवस के रूप में मनाकर उनके प्रति सम्मान प्रकट किया जाता हैं 17 अप्रैल 1975 को लम्बी बीमारी के बाद इस महापुरुष का निधन हो गया।
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ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की जीवनी

हमारे देश के ग्यारहवें राष्ट्रपति, एक ख्याति प्राप्त कुशल वैज्ञानिक, लेखक तथा युवा पीढ़ी के पथ प्रदर्शक, जी हाँ हम बात कर रहे हैं स्वर्गीय श्री ए. पी. जे. अब्दुल कलाम जी (A.P.J. Abdul Kalam) की, जो न जाने कितने ही लोगों के लिए प्रेरणा (Inspiration) बन गए | ये एक उच्च विचारों वाले व्यक्ति थे जिन्होंने तमिलनाडु के छोटे से गाँव में जन्म लिया था | अपनी कड़ी तपस्या और उच्च सिद्धांतों के कारण ही वे इस मुकाम तक पहुंचे | भारत के हर घर में उनका नाम बहुत ही सम्मान के साथ लिया जाता है, यहाँ का हर विद्यार्थी उनको अपना आदर्श (Idol) स्वरूप मानता है | इनके कई कथनों ने युवाओं को एक नई दिशा प्रदान की |
Dr. A.P.J. Abdul Kalaam Biography in Hindi
कलाम साहब की पुण्य तिथि (27 जुलाई 2015) भी आने को ही है तो आज हम उनके स्मरण में आपको उनके जीवन की विस्तृत जानकारी देंगे या यूँ कह लीजिये की हम आपको  ए. पी. जे. अब्दुल कलाम की जीवनी (Dr. A.P.J. Abdul Kalam Biography in Hindi) के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे | हम आपको इस लेख द्वारा बताएँगे कि कैसे उन्होंने एक छोटे से गाँव से लेकर राष्ट्रपति बनने का अद्भुत सफ़र तय किया |

A.P.J. Abdul Kalam Autobiography in Hindi

A.P.J. Abdul Kalam का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के छोटे से गाँव में हुआ, जिसका नाम धनुषकोडी है | इस गाँव में वे अपने संयुक्त परिवार के साथ रहते थे | उनके परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी | उनके पिता मछुआरों को नाव किराए पर देते थे तथा उनकी माता गृहिणी थीं | A.P.J. Abdul Kalam साहब ने अपनी शिक्षा का आरम्भ रामेश्वरम के एक प्राथमिक विद्यालय से किया | कलाम साहब ने अपनी पढ़ाई पूरी करने व् घर की आर्थिक सहायता हेतु अख़बार बेचने का कार्य आरम्भ किया |
A.P.J. Abdul Kalam ने बारहवीं रामनाथपुरम में स्थित स्च्वार्त्ज़ मैट्रिकुलेशन स्कूल (Schwartz Higher Secondary School) में सम्पन्न की | तत्पश्चात उन्होंने स्नातक की उपाधि  (Bachelor Degree) प्राप्त करने हेतु सैंट जोसफ कॉलेज (St. Joseph College) में दाखिला लिया जो तिरुचिराप्पल्ली में स्थित है | किन्तु यहाँ उनकी शिक्षा का अंत नहीं हुआ, उन्हें पढने व् सीखने का बहुत शौक था | वह आगे की पढ़ाई हेतु 1955 में मद्रास जा पहुंचे जहां से उन्होंने 1958 में अंतरिक्ष विज्ञान में स्नातक की उपाधि प्राप्त की | उनका सपना था कि वह भारतीय वायु सेना में फाइटर प्लेन के चालक यानि पायलट (Pilot) बन सकें, परन्तु यह पूर्ण न हो पाया, पर फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी | इसके पश्चात उन्होंने भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संस्थान (DRDO) में प्रवेश किया जहां उन्होंने हावरक्राफ्ट परियोजना का सफल संचालन किया | परन्तु DRDO में अपने कार्यों से संतुष्ट न होने के कारण उन्होंने इसे छोड़ दिया |
A.P.J. Abdul Kalam with Indian Army
इसके पश्चात उन्होंने 1962 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में प्रवेश किया | इसरो (ISRO) में A.P.J. Abdul Kalam ने कई परियोजनाओं का सफलतापूर्वक संचालन किया, जिनमें से सबसे महत्वपूर्ण था उनके द्वारा भारत के पहले उपग्रह “पृथ्वी” जिसे SLV3 भी कहा जा सकता है, का पृथ्वी की कक्षा के निकट स्थापित किया जाना | इस कार्य को Dr. A.P.J. Abdul Kalam ने 1980 में बहुत ही मेहनत तथा लगन के साथ संपन्न किया | उनकी इसी सफलता के बाद भारत भी अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष क्लब का सदस्य बन पाया | इस दौर में वह इसरो (ISRO) में भारत के उपग्रह प्रक्षेपण यान परियोजना के निदेशक के पद पर नियुक्त थे | इसरो के कार्यकाल के दौरान ही उन्होंने और भी उपलब्धियां हासिल कीं जैसे – नासा की यात्रा, प्रसिद्ध वैज्ञानिक राजा रमन्ना के साथ मिलकर भारत का पहला परमाणु परीक्षण, गाइडेड मिसाइल्स को डिज़ाइन करना |
इन सबके पश्चात A.P.J. Abdul Kalam एक सफल तथा ख्याति प्राप्त वैज्ञानिक (Scientist) बन चुके थे | 1981 में उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण से सम्मानित किया गया | 1982 में वह पुन: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के निदेशक के रूप में विद्यमान हुए | अब उन्होंने स्वदेशी लक्ष्य भेदी नियंत्रित प्रक्षेपास्त्र (गाइडेड मिसाइल्स) की तरफ अपना ध्यान केन्द्रित किया |
Dr. A.P.J. Abdul Kalam को 1990 में फिर पद्म विभूषण से नवाज़ा गया | तत्पश्चात वे 1992 से लेकर 1999 तक के कार्यकाल में रक्षा मंत्री के विज्ञान सलाहकार के पद पर नियुक्त रहे, साथ ही वह सुरक्षा शोध और विकास विभाग के सचिव भी थे | 1997 में उनका भारत के प्रति योगदान देखते हुए उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया | उन्हीं के नेतृत्व में 1998 में भारत ने अपना दूसरा सफल परमाणु परीक्षण किया | कलाम साहब की ही देन है कि भारत आज परमाणु हथियार के निर्माण में सफल हो पाया है | इस दौर में वह भारत के सबसे प्रसिद्ध एवं सफल परमाणु वैज्ञानिक (Nuclear Scientist) थे |
APJ Abdul Kalam Biography in Hindi

2002 में उनके प्रति भारत की जनता में सम्मान देखते हुए, जीवन की उपलब्धियों तथा भारत के प्रति उनका लगाव देखते हुए एन. डी. ए. ने उन्हें राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया | फलस्वरूप वह चुनाव में विजयी होकर 2002 में भारत के राष्ट्रपति (President) के रूप में हमारे सामने आये | उन्हें “जनता का राष्ट्रपति (People’s President)” कहकर संबोधित किया जाने लगा |
उनके इस कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई सभाएं संबोधित कीं जिनमें उन्होंने भारत के तथा यहाँ रह रहे युवाओं के भविष्य को बेहतर बनाने हेतु बातों पर जोर दिया | यह तो हम सभी जानते हैं कि A.P.J. Abdul Kalam अपनी निजी ज़िंदगी में एक सरल तथा अनुशासन प्रिय व्यक्ति थे | वे बच्चों से बहुत अधिक स्नेह करते थे, उन्हें हमेशा ऐसी सीख देते थे जो उनके भविष्य को बेहतर बनाने में सहायता करे | वे राजनीतिक व्यक्ति नहीं थे, किन्तु राजनीति में रहकर वे देश के विकास के बारे में सोचते थे | वे जानते थे कि युवाओं का बेहतर विकास ही देश को आगे लेकर जा सकता है | वे चाहते थे कि परमाणु हथियारों के क्षेत्र में भारत एक बड़ी शक्ति के रूप में जाना जाए |
उनका कहना था कि “2000 वर्षों के इतिहास में भारत पर 600 वर्षों तक अन्य लोगों ने शासन किया है। यदि आप विकास चाहते हैं तो देश में शांति की स्थिति होना आवश्यक है और शांति की स्थापना शक्ति से होती है। इसी कारण प्रक्षेपास्त्रों को विकसित किया गया ताकि देश शक्ति सम्पन्न हो।“
A.P.J. Abdul Kalam का राष्ट्रपति कार्यकाल 2007 में समाप्त हुआ | इसके पश्चात वह कई जगहों पर प्रोफेसर (Professor) के तौर पर कार्यरत रहे जैसे- शिलोंग, अहमदाबाद तथा इंदौर के भारतीय प्रबंधन संस्थानों, व् बैंगलोर के भारतीय विज्ञान संस्थान में | उसके बाद वह अन्ना विश्वविद्यालय में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग (Aerospace Engineering) के प्रोफेसर रहे | A.P.J. Abdul Kalam ने भारत के कई अन्य प्रसिद्ध शैक्षिक संस्थानों में भी अपना योगदान दिया |
APJ Abdul Kalam Biography in Hindi
आप में से शायद बहुत कम लोग ये जानते होंगे कि वे गीता और कुरान, दोनों का अनुसरण करते थे | उन्हें भक्ति गीत सुनने का तथा वाद्य यन्त्र बजाने का भी बहुत शौक था | उनका लगाव भारत की संस्कृति (Tradition) के प्रति बहुत अधिक था |
27 जुलाई 2015 को ये “मिसाइल मैन (Missile Man)” हम सब को छोड़ कर चले गए तथा उनका जाना हमारे देश के लिए कभी पूर्ण न होने वाली क्षति (Loss) थी | कलाम साहब की मृत्यु की वजह दिल का दौरा था | यह उस वक़्त हुआ जब वह शिलोंग के भारतीय प्रबंधन संस्थान में एक व्याख्यान (Lecture) दे रहे थे | 28 जुलाई को उन्हें दिल्ली में तथा 29 जुलाई को उन्हें मदुरै में श्रद्धांजलि (Tribute) दी गयी | 30 जुलाई को उन्हें उन्ही के नगर रामेश्वरम के पी करूम्बु ग्राउंड में पूरे सम्मान के साथ दफनाया गया तथा यहाँ उन्हें 3,50,000 से ज्यादा नागरिक श्रध्दांजलि देने पहुंचे | शायद आप जानते नहीं होंगे की गूगल भी उनकी पुण्य तिथि पर अपने मुख्य पृष्ठ (Home Page) पर काला रिबन दिखा रहा था | भारत सरकार ने उनके सम्मान (Honor) में सात दिवसीय राजकीय शोक की घोषणा की |
संयुक्त राष्ट्र द्वारा स्वर्गीय डॉक्टर ए. पी. जे. अब्दुल कलाम के 79 वें जन्मदिन को विश्व विद्यार्थी दिवस (World Student Day) के रूप में मनाया गया | उन्होंने युवाओं को प्रेरित (Inspire) करने हेतु कई किताबें लिखीं जो बहुत ही प्रभावशाली हैं – विंग्स ऑफ़ फायर, ए मैनिफेस्टो फॉर चेंज, इंस्पायरिंग थॉट्स, इत्यादि | ये किताबें भी कलाम साहब ( Dr. A.P.J. Abdul Kalam) की तरह प्रेरणादायक (Inspirational) हैं |
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APJ Abdul Kalam Autobiography in Hindi
Dr. A.P.J. Abdul Kalam ऐसे शख्स थे जो एक ग़रीब परिवार से आये और अपनी मेहनत (Hard Work) और अनुशासन के कारण एक सफल वैज्ञानिक (Scientist), एक लोकप्रिय राष्ट्रपति तथा एक आदर्श प्रोफेसर बन गए | अगर आप इनके जीवन का गहन अध्ययन करेंगे तो जान पाएंगे कि हालात को जिम्मेदार ठहराते हुए हार मानकर बैठने वाले लोग कभी आगे नहीं बढ़ते | विश्व भर के लोग, बच्चों के प्रति उनके स्नेह, उनकी सरलता तथा विनम्रता की प्रशंसा किया करते हैं | कलाम साहब में सीखने की भूख थी | इतनी विश्व प्रसिद्धि पाने के बाद भी वह बेहद सरल और साधारण इंसान थे |
इनकी एक कहावत है, ” “सबसे उत्तम कार्य क्या होता है? किसी इंसान के दिल को खुश करना, किसी भूखे को खाना देना, ज़रूरतमंद की मदद करना, किसी दुखियारे का दुख हल्का करना और किसी घायल की सेवा करना…” |

नरेंद्र मोदी की जीवनी


narendra modi in hindi
NAMO – Primary Minister of India
“मैं प्रधानमंत्री के रूप में नहीं प्रधानसेवक के रूप में आपके बीच उपस्थित हूँ” – Narendra Modi
नरेंद्र मोदी – एक चाय वाले से प्रधानमंत्री तक का अद्भुत सफर (Narendra Modi’s Incredible Journey From a Tea-Seller To The PM of India and History of Narendra Modi In Hindi)
नरेंद्र मोदी हमारे देश के वर्तमान प्रधानमंत्री हैं। 2014 के चुनावों में उन्होंने भाजपा (B.J.P) को पूर्ण बहुमत से जितवाया। आज मोदी जी ने अपने व्यक्तित्व से बच्चे बच्चे में देश के प्रति कुछ कर गुज़रने की भावना उत्पन्न की है। Narendra Modi का जीवन बहुत ही साधारण तरीके से शुरू हुआ मगर अपनी मेहनत से उन्होंने असाधारण सफलता हासिल की। आज इस लेख (Article) में हम मोदी के चाय बेचने वाले दिनों से प्रधानमंत्री बनने तक के अद्भुत सफर (Amazing Journey and History of Narendra Modi) के बारे में जानेंगे।

History of Narendra Modi in Hindi

मुझे देश के लिए मरने का कोई अवसर नहीं मिला, लेकिन मुझे देश के लिए जीने का मौका मिला है  – Narendra Modi
भारत की आज़ादी के तीन वर्ष बाद गुजरात (Gujarat) के एक छोटे से कस्बे, वड़नगर (Vadnagar) में नरेंद्र मोदी का जन्म हुआ। दामोदर दास मोदी और हीरा बा की 6 संतानों में से मोदी उनकी तीसरी संतान थे। उनका परिवार बहुत ग़रीब था और एक कच्चे मकान में रहता था। दो वक्त की रोटी भी बड़ी मुश्किल से मिलती थी। नरेंद्र मोदी की माँ आस पड़ोस में बर्तन साफ करती थी ताकि अपने बच्चों का पालन पोषण कर सके। उनके पिता रेलवे स्टेशन पर चाय की एक छोटी सी दुकान (Tea Stall on Railway Station) चलाते थे। मोदी बचपन में अपने पिता की चाय की दुकान में उनका हाथ बटाते थे और रेल के डिब्बों में चाय बेचते थे। इन संघर्ष भरे दिनों का मोदी पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ा।
माना की अंधेरा घना है, लेकिन दिया जलाना कहाँ मना है  – Narendra Modi
चाय की दुकान संभालने के साथ साथ मोदी पढ़ाई लिखाई का भी पूरा ध्यान रखते थे। मोदी को पढ़ने का बहुत शौक था। वे अक्सर अपने स्कूल के पुस्तकालय में घंटों बिता दिया करते थे। उनके सहपाठी (Classmate) और शिक्षक बताते हैं कि मोदी शुरू से ही एक कुशल वक्ता (Excellent speaker) थे और उनमें नेतृत्व करने की अद्भुत क्षमता थी। वे नाटकों और भाषणों में जमकर हिस्सा लेते थे। नरेंद्र को खेलों में भी बहुत दिलचस्पी थी। मोदी हिन्दू और मुस्लिम दोनों के त्यौहार बराबर उत्साह से मनाते थे। मोदी बचपन से ही बहुत बहादुर (Brave) थे। एक बार वे एक मगर के बच्चे को हाथ में उठाकर घर ले आए थे। ऐसे थे हमारे छोटे नरेंद्र।
जो निरंतर चलते रहते हैं वही बदले में मीठा फल पाते हैं। सूरज की अटलता को देखो – गतिशील और लगातार चलने वाला, कभी ठहरता नहीं, इसलिए बढ़ते चलो  – Narendra Modi

History of Narendra Modi in Hindi
Narendra Modi Childhood Photo

बचपन से ही मोदी में देश भक्ति (Patriotism) कूट कूट कर भरी थी। 1962 में भारत चीन युद्ध के दौरान मोदी रेलवे स्टेशन पर जवानों से भरी ट्रेन में उनके लिए खाना और चाय लेकर जाते थे। 1965 में भारत पाक युद्ध के दौरान भी मोदी ने जवानों की खूब सेवा की। युवावस्था में मोदी पर स्वामी विवेकानंद का बहुत गहरा प्रभाव पड़ा। उन्होंने स्वामी जी के कार्यों का गहराई से अध्ययन किया जिसने उन्हें जीवन के रहस्यों की खोज की तरफ आकर्षित किया और उनमें त्याग और देश भक्ति (Patriotism) की भावनाओं को नई उड़ान दी। उन्होंने स्वामी जी के भारत को विश्व गुरु बनाने के सपने को साकार करना अपने जीवन का मकसद बना लिया।
एक विचार लो,  उस  विचार  को  अपना जीवन  बना  लो उसके  बारे  में  सोचो  उसके  सपने  देखो, उस  विचार  को  जियो, अपने  मस्तिष्क,  मांसपेशियों,  नसों,  शरीर के हर हिस्से को उस विचार में डूब जाने दो, और बाकी सभी विचार को किनारे रख दो, यही सफल होने का रास्ता है  – Swami Vivekananda
17 साल की उम्र में मोदी ने घर छोड़ दिया और अपनी आध्यात्मिक यात्रा (Spiritual journey) शुरू की। उन्होंने भारत के विभिन्न हिस्सों का भ्रमण किया। उन्होंने हिमालय में ऋषीकेश, बंगाल में रामकृष्ण आश्रम और पूर्वोत्तर भारत की यात्रा की और फिर दो वर्ष बाद वे घर लौट आए। इन यात्राओं से उन्हें स्वामी विवेकानंद को और गहराई से जानने का सौभाग्य मिला जिसने उन्हें पूरी तरह बदल दिया। जब वे घर लौटे, उनका मकसद साफ था- राष्ट्र की सेवा (Serving the Nation)। वे केवल दो सप्ताह ही घर पर रुके और फिर अहमदाबाद (Ahmedabad) के लिए निकल पड़े। वहाँ जाकर वे आर.एस.एस. (R.S.S.) के सदस्य बन गए। आर.एस.एस. (R.S.S.) एक ऐसा संगठन है जो देश  के सामाजिक, आर्थिक, और सांस्कृतिक विकास के लिए कार्य करता है।
कड़ी मेहनत कभी थकान नहीं लाती, वह तो संतोष लाती है  – Narendra Modi

Narendra Modi Wikipedia in Hindi
Narendra Modi Young Picture

1972 में मोदी आर.एस.एस. (R.S.S.) के प्रचारक बन गए और अपना सारा समय आर.एस.एस. (R.S.S.) को देने लगे। वे सुबह पाँच बजे उठ जाते और देर रात तक काम करते। इस व्यस्त दिनचर्या के बावजूद उन्होंने अपनी शिक्षा पूरी की और राजनीति विज्ञान में डिग्री हासिल की (Degree in political science)। प्रचारक होने के नाते मोदी ने गुजरात के विभिन्न हिस्सों का भ्रमण किया और लोगों की समस्याओं को करीब से समझा। 1975 में देश में जब आपातकाल (Emergency) के काले बादल छाए थे, तब आर.एस.एस. (R.S.S.) जैसी संस्थाओं पर प्रतिबंध लग गया था। फिर भी मोदी भेष बदलकर देश की सेवा करते रहे और सरकार की गलत नीतियों का जमकर विरोध किया। आर.एस.एस. (R.S.S.) में बेहतरीन काम की बदौलत उन्हें भाजपा (B.J.P.) में नियुक्त किया गया। Narendra Modi ने 1990 में आडवाणी की अयोध्या रथ यात्रा का भव्य आयोजन किया जिससे भाजपा (B.J.P.) के वरिष्ठ नेता काफी प्रभावित हुए। उनके अद्भुत कार्य की बदौलत भाजपा (B.J.P.) में उनका कद बढ़ता रहा।
काम को ही महत्वाकांक्षा बन जाने दीजिये  – Narendra Modi
2001 में Gujarat में भयानक भूकंप (Earthquake) आया और पूरे Gujarat में भारी विनाश हुआ। गुजरात सरकार के राहत कार्य से ना खुश होकर भाजपा (BJP) के वरिष्ठ नेताओं ने Narendra Modi को गुजरात का मुख्यमंत्री (Chief Minister of Guajart) बना दिया। मोदी ने काफी कुशलता से राहत कार्य संभाला और गुजरात को फिर से मज़बूत किया। मोदी ने गुजरात को भारत का सबसे बेहतरीन राज्य बना दिया। उन्होंने गाँव गाँव तक बिजली (Electricity) पहुँचाई। देश में पहली बार किसी राज्य की सभी नदियों को जोड़ा गया जिससे पूरे राज्य में पानी की कमी दूर हुई। एशिया के सबसे बड़े सोलर पार्क (Asia’s Largest Solar Park) का निर्माण Gujarat में हुआ। गुजरात के सभी गाँवों को इंटरनेट से जोड़ा गया और टूरिज़्म को भी बढ़ावा दिया गया (Tourism has also Promoted)। Modi के कार्यकाल में Gujarat में बेरोज़गारी काफी कम हुई (Unemployment Decreased) और महिलाओं की सुरक्षा में काफी मज़बूती आई। इन्ही कारणों की वजह से गुजरात की जनता ने मोदी को चार बार लगातार अपना मुख्यमंत्री (C.M.) नियुक्त किया।
मेरे जीवन में मिशन (Mission) सबकुछ है, एम्बिशन (Ambition) कुछ भी नहीं … यदि मैं नगर निगम का भी अध्यक्ष होता तो भी उतनी ही मेहनत से काम करता जितना C.M. होते हुए करता हूँ  – Narendra Modi
Gujarat में Modi की सफलता देखकर भाजपा (B.J.P.) के बड़े नेताओं ने Modi को 2014 लोक सभा चुनावों का प्रधानमंत्री  उम्मीदवार (Prime Minister Candidate) घोषित किया। मोदी ने पूरे भारत में अनेक रैलियाँ की जिनमें हज़ारों लोग उन्हें सुनने आते थे। मोदी ने सोशल मीडिया (Social Media) का भी भरपूर लाभ उठाया और लाखों लोगों तक अपनी बात रखी। मोदी के गुजरात में विकासशील कार्य, उनके प्रेरणादायक भाषण (Inspirational Speech), देश के प्रति उनका प्यार, उनकी साधारण शुरुआत और उनकी सकारात्मक सोच (Positive thinking) के कारण उन्हें भारी मात्रा में वोट मिले और वे भारत के पंद्रहवे प्रधानमंत्री बने (India ‘s Fifteenth Prime Minister)।
प्रधानमंत्री (P.M.) बनने के बाद वे भारत का कुशलता से नेतृत्व कर रहे हैं और भारत को नई उचाईओं पर पहुँचा रहे हैं। उन्होंने कई विदेश यात्राएँ की और भारत की छवि संपूर्ण विश्व में मज़बूत की। इसी कारण विदेशों द्वारा भारत में काफी निवेश हुआ। मोदी ने पड़ोसी देशों से भी काफी अच्छे संबंध बनाए। मोदी ने जन धन योजना (Jan Dhan Yojna), स्वच्छ भारत अभियान (Clean India Campaign), मेक इन इंडिया (Make in India) और डिजिटल इंडिया (Digital India) जैसी  कई योजनाओं की शुरुआत की जिससे India में काफी विकास (Development) हो रहा है ।
अगर 125 करोड़ भारतीय एकता, शांति और सदभाव के मंत्र के साथ कंधे से कंधा मिला कर एक कदम बढ़ाएं तो देश एक बार में 125 करोड़ कदम आगे बढ़ जाएगा  – Narendra Modi
Narendra Modi बहुत ही मेहनती व्यक्ति हैं। वे 18 घंटे काम करते हैं और कुछ ही घंटे सोते हैं। वे शुद्ध शाकाहारी (Vegetarian) हैं और नवरात्रों के नौ दिन उपवास रखते हैं। मोदी अपनी सेहत का भरपूर ध्यान रखते हैं और प्रतिदिन योग (Yoga) करते हैं, भले ही वे कहीं भी हों। मोदी हमेशा साफ कपड़े पहनते हैं और लोग उन्हें फैशन आइकॉन के रूप में देखते हैं। नेता होने के अलावा मोदी एक कवि और लेखक भी हैं। वे अपने भाषणों से लाखों युवाओं का मनोबल बढ़ाते हैं और उनमें देश भक्ति की भावना जगाते हैं।
डरते वो हैं जो अपनी छवि के लिए मरते हैं, मैं तो हिंदुस्तान की छवि के लिए मरता हूँ, इसीलिए किसी से नहीं डरता हूँ  – Narendra Modi
मोदी जी (Modi Biography) से हमें यह सीख मिलती है कि हमें हमेशा मेहनत करनी चाहिए और निस्वार्थ भाव से देश की सेवा करनी चाहिए। ये हमारे गणतंत्र की ताकत ही है जिसने एक चाय वाले को देश का प्रधानमंत्री (Prime Minister) बनने का अवसर दिया। उम्मीद है आप सभी को Narendra Modi के जीवन से प्रेरणा (Inspirational) मिलेगी और आप अपने सपने साकार करेंगे। मेरी आप सभी से यह विनती है कि हमें मोदी जी के भारत को विश्व गुरु बनाने के मिशन में उनका पूरा साथ देना चाहिए। धन्यवाद। 🙂

कैसे विफलता पर काबू पाए और सफलता हासिल करे

how to overcome failure
अगर आपने हाल ही में Failure का सामना किया है तो हम समझ सकते है की आपकी मानसिक अवस्था क्या होगी ।
आपका सर घूम रहा होगा और आपके विचार बहुत ही नेगेटिव होंगे, मन में कई हज़ारों सवाल खड़े हो रहे होंगे जैसे की यह मेरे साथ ही क्यों हुआ? मेरे साथ ही हर बार ऐसा क्यों होता है? मेरी तो किस्मत ही खराब है, इस तरह के हजारों सवाल और दूर – दूर तक अंधेरा ही दिख रहा होगा ।
लेकिन अभी के लिए सभी चिंताओं को छोड़ दे और पूरे दिल से इस लेख को पढ़िए क्योंकि इस लेख में हम शेयर कर रहे बहुत ही महत्वपूर्ण बातें जो आपके Failure के सिरदर्द को गायब कर सफलता के लिए नया जोश, उत्साह और प्रेरणा की नई साँसे आपके अंदर भरेगा ।
आइए तो शुरू करते है 5 ऐसी बातें जो आपके Failure नाम के रोग को दूर करने के लिए दवाई की तरह उपयोग करनी है ।
accept failure and take rest

1 – Take Rest (छोटा-सा रेस्ट ले)

जैसे की हमने ऊपर बताया की अगर आपने हाल ही में Failure का सामना किया है तो आपका सिस्टम बहुत ही तेज़ चल रहा होगा और आप बहुत ही तनाव में होंगे ।
लेकिन अगर आप कोई समाधान चाहते है तो आपको इस परिस्थिति से बहार आना होगा मतलब की आपको आपके सिस्टम को थोड़ा शांत, धीमा करना होगा, आपके मन के विचारों पे लगाम लगाकर शांत होना होगा और इसके लिए यह बहुत ही जरूरी है की आप एक छोटा-सा रेस्ट ले ।
रेस्ट का मतलब है की आपको इस शोर – शराबे से अपने आपको दूर करना है और आपको ऐसी जगह जाना है जहाँ सिर्फ आप अपने साथ हो और आप अपने दिल की बातें सुन पाए, आप खुद को खुद की नजरों से देख पाए और आकलन कर पाए ।
कोशिश करे की आप थोड़े समय के लिए लोगों से कट कर प्रकृति के साथ जुड़े क्योंकि प्रकृति से आपको ऊर्जा और शांति मिलेगी जिससे आपके अंदर की थकावट कम होगी और आपका सिस्टम भी धीमा होगा ।
यह रेस्ट आपके मानसिक स्वस्थता प्राप्त करने के लिए बेहद जरूरी है इससे आप फिर से तरोताजा महसूस करेंगे और यह रेस्ट वाला स्टेप आपके आगे के स्टेप लेने में भी मदद करेगा ।
Analyze Failure

2 – Analyze Failure (विफलता का विश्लेषण करें)

अगर आपने पहले स्टेप को अनुसरण कर लिया है तो तकरीबन आपका सिस्टम धीमा, शांत हो गया होगा और अब आप अपने Failure की समीक्षा करने के योग्य स्थिति में पहुँच गए है ।
अब आपको अपने फेलियर की खुले दिल से समीक्षा करनी है इसके लिए पेन और नोटबुक लेकर लोगों से दूर एकांत जगह पर चले जाए, वहाँ जाकर थोड़ी देर के लिए आखें बंद कर शांति से बैठ जाए फिर धीरे – धीरे अपनी योजनाओं (plans) को देखे की आपने क्या सोचकर काम का आरंभ किया था? कैसे प्लान्स बनाए थे? किस ऊर्जा के साथ आगे बढ़े थे? कौन सी वजहें थी जिससे आपके प्लान्स fail हुए? किस कारण आपको आपका मन चाहा परिणाम नहीं मिला? ऐसे शुरू से अंत तक आपको सभी बातें सोचनी है और जो भी महत्वपूर्ण पॉइंट लगे इसे नोटबुक में लिखते रहना है ।
अब आपके सामने पूरा प्लान खुला हुआ है, आप खुले दिल से देखे की कौन – कौन सी आपकी गलतियाँ थी जिससे आपको Failure का मुँह देखना पड़ा ।
अपनी सभी गलतियों की लिस्ट बना लीजिए और फिर देखिये की अभी इसमें से ऐसी कितनी गलतियाँ है जिसे अभी भी आप सुधार सकते है और अगर आप अभी भी सुधार सकते है तो अभी से लग जाए अपनी गलतियों को सुधारने के काम में ।
Understand failure

3 – Understand Failure and Focus on Learning (विफलता को समझे और सीखने पर ध्यान केंद्रित करे)

समझ लीजिए कि फेलियर अंत नहीं है, यह एक नई शुरुआत है ।
अब आपका सिस्टम भी शांत है और आपने अपनी गलतियाँ भी पकड़ ली है तो अब बारी है हमारे Failure को समझने की ।
आपके हाथ में जो था वो आपने अब तक बेस्ट कर लिया जैसे गलतियाँ भी पकड़ी और उसे सुधारने की कोशिश भी की और अब हमें अपने Failure को और गहराई से जानना है ।
हमेशा याद रखे fail आपके प्लान होते है आप नहीं ।
हम जब तक चलते रहते है, जब तक हार नहीं मानते तब तक हम कभी fail नहीं है, अगर आज आपने Failure का सामना किया है तो वो आपके प्लान्स की नाकामयाबी है आपकी नहीं, आप फिर से अपने नए प्लान के साथ आगे बढ़ सकते है और बेहतर परिणाम पा सकते है । ऐसा कई लोगों ने किया है और यह बहुत ही आसान है ।
फेलियर का मतलब आपका अंत नहीं है बल्कि आपकी नई शुरुआत है अपने नए अनुभव के साथ ।
फेलियर कोई अंतिम लक्ष्य या श्राप नहीं है वो तो सफलता (Success) के रास्ते में आने वाला एक छोटा-सा भाग है इसलिए बार – बार फेलियर के बारे में सोचकर खुद को नीचे ना गिराए, खुद को अपराधी या दोषी ना साबित करे बल्कि फेलियर को समझकर आगे बढ़े ।
अगर आप बारीकी से देखेंगे तो आपको समझ आजायेगा की विफलता तो एक मात्र इशारा भर है सफलता की तरफ और मजबूती से आगे बढ़ने के लिए इसलिए बिना घबराहट आगे बढ़े ।
Move forward and Try again

4 – Move Forward and Try again (आगे बढ़े और फिर से कोशिश करे)

अब तक आपने अपनी गलतियाँ भी जान ली है और इससे आपने बहुत सिख भी लिया है, अब बारी है फिर से नई शुरुआत की, फिर से नए प्लान्स बनाने और उसपर काम करने की ।
अपने इस नए अनुभव का उपयोग कर के नए प्लान गठित करे और कैसे आगे बढ़ना है, कैसे समस्याओं का सामना करना है और अगर फिर से आपके प्लान्स काम नहीं कर रहे तो इस स्थिति से कैसे निपटना है यह सब आप सोच, समझ और अनुभव का उपयोग कर के प्लानस बनाए ।
फिर पूरे जोश, ऊर्जा और अपने अनुभव के साथ काम पर लग जाइए और भरोसा रखे बेहतरीन दिन, परिणाम आने वाले है ।
The Best is Yet to Come.

5 – Improve and Inspire Your self (अपने आप में सुधार और अपने आपको प्रेरित करे)

अब आपकी मानसिक अवस्था बहुत ही मजबूत और सकारात्मक (Positive) होगी लेकिन फिर भी कुछ ऐसी आदतें (Habits) है जिसे हमे अपने जीवन में अपनाना चाहिए जिससे आप हर दिन सकारात्मकता और ऊर्जा से भरे रहे चाहे आपके प्लान काम करे या ना करे चाहे आप सफलता अर्जित करे या ना करे लेकिन आपका मन हमेशा खुश और सकारात्मक रहेगा और यही बुनियादी सफलता है ।

Self–belief (आत्मविश्वास)

खुद पे यकीन रखे आप जो भी हो, आप जो भी कर रहे हो आप इसमें सबसे बेस्ट है, आप में वो काबिलियत है जिससे आप अपने सभी सपनों को साकार कर लेंगे ।
आप में वो हर हुनर, काबिलियत है जो एक सफल व्यक्ति में होनी चाहिए इसलिए कभी भी अपने आप को किसी से कम या छोटा मत मानो, आप में, मेरे में, Sandeep Maheshwari में और Narendra Modi में सब में एक ही ऊर्जा है, एक ही शक्ति है बस फर्क है तो चाहना (desire) और समर्पण (dedication) का बस आप भी अपने desire चुन ले और काम में अपने आपको पूर्ण समरपित कर दीजिए और कल लोग सफलता के लिए आपका ही उदाहरण देंगे ।

Read Positive Books (सकारात्मक किताबें पढ़ें)

यह बहुत ही जरूरी है अगर आप अपने अंदर से Positive होना चाहते है तो Books पढ़ने को अपनी रोज़ाना आदतों में शामिल कर लो ।
रोजाना कुछ अच्छी Positive Books पढ़े इससे आपको अंदरूनी शक्ति, ऊर्जा और ज्ञान प्राप्त होगा और सही ज्ञान से आपके अंदर का डर ख़तम हो जायेगा और नया आत्मविश्वास (Self-confidence) प्रज्वलित होगा ।

Do Meditation Regular (हररोज ध्यान करे)

यह एक और आसान और शक्तिशाली तकनीक है जिसके जरिये आप अपने अंदर के अंधेरे को ख़तम कर के आध्यात्मिक उजाले की और आगे बढ़ सकते है जिसके जरिए आप सुख, शांति और संपूर्णता प्राप्त कर सकते है ।
यह मेरी सबसे पसंदीदा आदतों में से एक है आप भी इसे अपने जीवन में अपनाए और इससे आपके अंदर एक दिया प्रज्वलित होगा जो आपका हर अंधेरे में दिशा निर्देश करेगा ।

Become Friend to Yourself (खुद के अच्छे मित्र बन जाए)

खुद को खुद से ज्यादा ना कोई जान सकता है और ना ही कोई समझ सकता है ।
इसलिए खुद के अच्छे मित्र बन जाए, खुद से बातें करना सीखें, खुद को ही सवाल करे और खुद से ही जवाब मांगे और जब अंदर से जवाब मिलने शुरू हो जायेंगे तो दुनिया की कोई भी ताकत आपको ना तो नकारात्मक कर पाएगी और नहीं परेशान ।
प्रिय मित्रों हमारा काम यही तक था की आपके सामने सही और आसान बातें रखे, जो आपकी मुश्किलों को तोड़ कर आपको एक हौसला दे, उम्मीद दे और प्रेरणा दे अब आपकी बारी है की आप इसे अपने जीवन में कैसे अपनाते है और इसका किस तरह का फायदा प्राप्त करते है ।
प्रिय मित्रों आप यह जरूर खयाल रखे की कोई कितना भी बड़ा शानदार प्लान हो लेकिन जब तक उस पर Action नहीं लेते वो बेकार है इसलिए हमने तो अपनी तरफ से एक शानदार लेख आपके सामने रख दिया है अब Action लेने की बारी आपकी है । 🙂